विधान परिषद क्या है? MLC कैसे चुने जाते हैं और इसका क्या काम है?
जब हम चुनाव की बात करते हैं तो अक्सर MLA और विधानसभा का नाम सुनते हैं। लेकिन कुछ राज्यों में विधानसभा के साथ एक दूसरा सदन भी होता है, जिसे विधान परिषद कहा जाता है।

आसान भाषा में समझें तो विधान परिषद राज्य के विधानमंडल का ऊपरी सदन है। जिस तरह केंद्र में लोकसभा के साथ राज्यसभा है, उसी तरह कुछ राज्यों में विधानसभा के साथ विधान परिषद होती है।
ऐसे समय में यह सवाल और भी जरूरी हो जाता है कि आखिर MLC कौन होता है और विधान परिषद का काम क्या है?
विधान परिषद क्या है?
विधान परिषद राज्य के विधानमंडल का ऊपरी सदन है। इसे अंग्रेजी में Legislative Council कहा जाता है।
हर राज्य में विधान परिषद नहीं होती। जिन राज्यों में यह व्यवस्था है, वहां राज्य का विधानमंडल दो सदनों से मिलकर बना होता है—विधान सभा और विधान परिषद।
विधान परिषद में कानूनों और राज्य से जुड़े दूसरे मामलों पर चर्चा होती है। इसके सदस्य अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों से आते हैं, इसलिए इसे राज्य की विधायी व्यवस्था में एक अतिरिक्त सदन के रूप में समझा जा सकता है।
भारत में कितने राज्यों में विधान परिषद है?

अभी भारत के 6 राज्यों में विधान परिषद है।
ये राज्य हैं:
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
डिजिटल संसद की राज्य विधानमंडल संबंधी जानकारी और उपलब्ध संवैधानिक व्यवस्था भी इन राज्यों की दो-सदनीय व्यवस्था की पुष्टि करती है।
यह बात ध्यान रखने वाली है कि विधान परिषद कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जो हर राज्य में अपने आप बन जाती है। संविधान ने राज्यों को इसके गठन या समाप्त करने का रास्ता दिया है।
डिजिटल संसद पर राज्य विधानसभाओं और विधान परिषदों की जानकारी देखें
विधान परिषद क्यों बनाई जाती है?
विधान परिषद का एक मकसद यह है कि किसी राज्य में कानून बनाने की प्रक्रिया में अलग-अलग क्षेत्रों और लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिल सके।
उदाहरण के लिए, विधान परिषद में स्थानीय निकायों, शिक्षकों और स्नातकों के लिए अलग चुनाव व्यवस्था है। कुछ सदस्यों को राज्यपाल भी मनोनीत करते हैं।
यानी यहां केवल आम विधानसभा चुनाव के जरिए चुने गए विधायक ही सदस्य नहीं बनते।
इसी वजह से विधान परिषद को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके सदस्य अलग-अलग तरीकों से चुने जाते हैं।
MLC क्या होता है?

विधान परिषद के सदस्य को MLC कहा जाता है। इसका पूरा नाम Member of Legislative Council यानी विधान परिषद का सदस्य है।
जिस तरह विधानसभा के सदस्य को MLA कहा जाता है, उसी तरह विधान परिषद के सदस्य को MLC कहा जाता है।
MLC राज्य के विधान परिषद में बैठकर कानूनों और राज्य से जुड़े दूसरे मामलों पर चर्चा में हिस्सा लेता है।
विधान परिषद के सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि MLC का चुनाव आखिर होता कैसे है?
विधान परिषद के सदस्यों को केवल आम जनता सीधे वोट देकर नहीं चुनती। संविधान के अनुच्छेद 171 में इसके लिए अलग-अलग चुनावी व्यवस्था बताई गई है।
विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव मुख्य रूप से इन तरीकों से होता है:
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1. स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि
लगभग एक-तिहाई सदस्यों का चुनाव नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों और कानून के अनुसार तय दूसरे स्थानीय निकायों के सदस्य करते हैं।
इसका मतलब है कि इस चुनाव में स्थानीय निकायों से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका होती है।
2. विधानसभा के विधायक
लगभग एक-तिहाई सदस्यों को राज्य की विधानसभा के सदस्य चुनते हैं।
इसके लिए विधानसभा के विधायक ऐसे लोगों में से चुनाव करते हैं जो उस समय विधानसभा के सदस्य नहीं होते।
3. स्नातक मतदाता
लगभग एक-बारहवां हिस्सा ऐसे निर्वाचन क्षेत्र से चुना जाता है जिसमें निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले स्नातक मतदाता वोट करते हैं।
इस व्यवस्था में स्नातक मतदाताओं के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र होता है।
4. शिक्षक मतदाता
लगभग एक-बारहवां हिस्सा शिक्षकों के निर्वाचन क्षेत्र से चुना जाता है।
इसमें संविधान में बताई गई शर्तों के अनुसार निर्धारित शैक्षणिक संस्थानों में कम से कम तीन साल पढ़ाने वाले योग्य शिक्षक मतदाता हिस्सा लेते हैं।
5. राज्यपाल द्वारा मनोनयन
बचे हुए सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
इनमें साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या काम का अनुभव रखने वाले लोगों को शामिल किया जा सकता है।
विधान परिषद में वोट कौन डालता है?
विधान परिषद के हर चुनाव में एक जैसे मतदाता नहीं होते।
किस सीट का चुनाव हो रहा है, उसके आधार पर मतदाता भी बदलते हैं।
जैसे:
- स्थानीय निकाय वाली सीट पर स्थानीय निकायों के योग्य प्रतिनिधि वोट करते हैं।
- स्नातक सीट पर योग्य स्नातक मतदाता वोट करते हैं।
- शिक्षक सीट पर योग्य शिक्षक मतदाता वोट करते हैं।
- कुछ सदस्यों का चुनाव विधायक करते हैं।
- कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
यही वजह है कि MLC चुनाव, विधानसभा चुनाव से काफी अलग दिखाई देता है।
विधान परिषद में कितने सदस्य होते हैं?
संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार किसी राज्य की विधान परिषद की सदस्य संख्या उसकी विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती।
साथ ही किसी राज्य की विधान परिषद में सदस्यों की संख्या 40 से कम नहीं हो सकती।
अलग-अलग राज्यों में सदस्यों की संख्या अलग है।
मौजूदा व्यवस्था में उत्तर प्रदेश में 100, महाराष्ट्र में 78, बिहार और कर्नाटक में 75-75, आंध्र प्रदेश में 58 और तेलंगाना में 40 विधान परिषद सदस्य हो सकते हैं।
भारत के संविधान में विधान परिषद से जुड़े प्रावधान
विधान परिषद का कार्यकाल कितना होता है?
विधान परिषद एक स्थायी सदन है। इसे विधानसभा की तरह एक साथ भंग नहीं किया जाता।
इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 साल होता है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य अपना कार्यकाल पूरा करते हैं। इसके बाद उन सीटों पर नए सदस्य आते हैं।
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि परिषद में हमेशा कुछ पुराने और कुछ नए सदस्य बने रहते हैं।
विधान सभा और विधान परिषद में क्या अंतर है?

विधानसभा और विधान परिषद दोनों राज्य के विधानमंडल का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन दोनों की चुनाव व्यवस्था और भूमिका एक जैसी नहीं है।
| आधार | विधान सभा | विधान परिषद |
|---|---|---|
| अंग्रेजी नाम | Legislative Assembly | Legislative Council |
| सदस्य | MLA | MLC |
| सदन | निचला सदन | ऊपरी सदन |
| चुनाव | मुख्य रूप से जनता सीधे चुनती है | अलग-अलग निर्वाचन समूहों से चुनाव |
| कार्यकाल | सामान्यतः 5 वर्ष | सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष |
| भंग होना | विधानसभा भंग हो सकती है | परिषद स्थायी सदन है |
| सदस्य चुनने की व्यवस्था | क्षेत्रीय चुनाव | स्थानीय निकाय, विधायक, शिक्षक, स्नातक आदि |
एक आसान उदाहरण लें।
अगर आप किसी विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं तो विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार को सीधे वोट देते हैं। लेकिन विधान परिषद की हर सीट पर आम मतदाता सीधे वोट नहीं देता।
क्या विधान परिषद राज्यसभा जैसी होती है?
कुछ मामलों में दोनों में समानता जरूर है।
राज्यसभा केंद्र का ऊपरी सदन है और विधान परिषद राज्य का ऊपरी सदन। दोनों स्थायी सदन हैं और इनके सभी सदस्य एक साथ अपना कार्यकाल पूरा नहीं करते।
लेकिन दोनों बिल्कुल एक जैसी नहीं हैं। विधान परिषद की शक्तियां और उसका संवैधानिक ढांचा राज्य स्तर के हिसाब से अलग है।
इसलिए यह कहना सही होगा कि विधान परिषद राज्य के स्तर पर ऊपरी सदन है, लेकिन इसे राज्यसभा की पूरी कॉपी नहीं माना जा सकता।
विधान परिषद का काम क्या है?
विधान परिषद में राज्य से जुड़े कानूनों और दूसरे महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा होती है।
किसी विधेयक पर सदस्यों की चर्चा से सरकार के सामने अलग-अलग सवाल और सुझाव रखे जा सकते हैं।
इसका एक फायदा यह है कि किसी कानून पर चर्चा के लिए विधानसभा के अलावा एक और सदन मौजूद रहता है।
हालांकि, विधान परिषद की शक्तियां विधानसभा के बराबर नहीं होतीं। खासकर धन विधेयक के मामले में विधानसभा की भूमिका ज्यादा मजबूत होती है।
क्या हर राज्य में विधान परिषद बनाई जा सकती है?
हां, संविधान इसके लिए रास्ता देता है।
संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार किसी राज्य में विधान परिषद बनाने या उसे समाप्त करने के लिए पहले उस राज्य की विधानसभा को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है।
इस प्रस्ताव के लिए विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई का समर्थन चाहिए। इसके बाद संसद कानून बनाकर विधान परिषद का गठन या समाप्ति कर सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि विधानसभा खुद से परिषद बना या खत्म कर देती है। अंतिम कानूनी कदम संसद के जरिए होता है।
क्या विधान परिषद को खत्म किया जा सकता है?
हां।
जिस तरह किसी राज्य में विधान परिषद बनाने का रास्ता है, उसी तरह उसे समाप्त करने का भी रास्ता संविधान में दिया गया है।
इसके लिए राज्य विधानसभा को अनुच्छेद 169 में बताई गई विशेष बहुमत वाली प्रक्रिया से प्रस्ताव पारित करना होता है। इसके बाद संसद कानून बनाती है।
इतिहास में कुछ राज्यों में विधान परिषदें खत्म भी की गई हैं। इसलिए यह व्यवस्था स्थायी रूप से हर राज्य में लागू होना जरूरी नहीं है।
2026 में विधान परिषद फिर चर्चा में क्यों है?
अक्टूबर 2026 में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव चर्चा में हैं।
इनमें उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटों के परिणाम 27 अक्टूबर 2026 को घोषित होने हैं।
यही वजह है कि इस समय MLC, विधान परिषद और उसके चुनाव से जुड़े सवाल लोगों की खोज में दिखाई दे रहे हैं।
लेकिन विधान परिषद को केवल चुनाव के समय समझना सही नहीं है। यह राज्य की कानून बनाने वाली व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आम लोगों के लिए विधान परिषद को समझना क्यों जरूरी है?
हम अक्सर विधानसभा चुनाव और MLA के बारे में सुनते हैं, लेकिन राज्य की पूरी राजनीतिक व्यवस्था केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है।
जिन छह राज्यों में विधान परिषद है, वहां कानून बनाने की प्रक्रिया में दूसरा सदन भी शामिल होता है।
अगर हमें अपने राज्य की राजनीति, सरकार और कानून बनने की प्रक्रिया को ठीक से समझना है तो विधानसभा के साथ विधान परिषद की जानकारी भी जरूरी है।
राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दल में क्या अंतर है?
आसान भाषा में समझें
अगर एक लाइन में समझना हो तो:
विधानसभा राज्य का निचला सदन है, जबकि विधान परिषद राज्य का ऊपरी सदन है। विधान परिषद केवल कुछ राज्यों में होती है और इसके सदस्यों को अलग-अलग निर्वाचन समूहों के जरिए चुना या राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।
यही MLC और MLA के बीच सबसे बड़ा फर्क भी है।
निष्कर्ष
विधान परिषद को समझना मुश्किल नहीं है। बस इतना याद रखें कि यह राज्य विधानमंडल का ऊपरी सदन है और हर राज्य में इसकी व्यवस्था नहीं है।
अभी भारत के छह राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—में विधान परिषद है। इसके सदस्य स्थानीय निकायों, विधायकों, शिक्षकों और स्नातकों के अलग-अलग निर्वाचन समूहों से चुने जाते हैं और कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
2026 के MLC चुनाव ने इस व्यवस्था को फिर चर्चा में ला दिया है। लेकिन इसका महत्व सिर्फ चुनाव तक नहीं है।
अगर हम भारतीय राजनीति को आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो MLA, MLC, विधानसभा और विधान परिषद के बीच का अंतर जानना हमारे लिए काफी उपयोगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. विधान परिषद क्या है?
विधान परिषद राज्य विधानमंडल का ऊपरी सदन है। यह केवल कुछ राज्यों में मौजूद है।
2. भारत में कितने राज्यों में विधान परिषद है?
वर्तमान में छह राज्यों में विधान परिषद है—उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।
3. MLC का पूरा नाम क्या है?
MLC का पूरा नाम Member of Legislative Council है। हिंदी में इसे विधान परिषद का सदस्य कहा जाता है।
4. विधान परिषद के सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
इसके सदस्य स्थानीय निकायों, विधानसभा के सदस्यों, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
5. क्या विधान परिषद को खत्म किया जा सकता है?
हां। संविधान के अनुच्छेद 169 में इसके लिए प्रक्रिया दी गई है। राज्य विधानसभा को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है, जिसके बाद संसद कानून बनाकर परिषद को समाप्त कर सकती है।
अब एक सवाल आपके लिए…
अब जब आपको पता चल गया कि विधान परिषद क्या है और MLC कैसे चुने जाते हैं, तो क्या आप जानते हैं कि विधानसभा और विधान परिषद में असली फर्क क्या होता है?
अगर यह जानकारी पहली बार आसान लगी है, तो इसे किसी ऐसे दोस्त के साथ शेयर करें जिसे भारतीय राजनीति समझने में रुचि है।
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